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लाठीचार्ज के लिए क्या अकेले दुष्यंत दोषी हैं? इन सबसे कोई इस्तीफा क्यों नहीं मांगता?

हयाणा में लाठीचार्ज पर सियासत गर्म होती जा रही है. पिछले काफी समय से इसको लेकर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से इस्तीफे की मांग हो रही है. उन्होंने भी स्पष्ट कर दिया है कि वो अभी कोई इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, जब भी किसानों के एमएसपी पर कोई दिक्कत आएगी तो वो तुरंत इस्तीफा दे देंगे. लेकिन इस सब के बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या लाठीचार्ज के लिए पूरी तरह डिप्टी सीएम दुष्यंत ही दोषी हैं. उनके अतिरिक्त भी ऐसे काफी लोग हैं जिन्होनें किसानों से वोट ली हैं और अब सत्ता में बैठे हैं, उनसे कोई इस्तीफा क्यों नहीं मांग रहा है.

क्या इन सबसे इस्तीफा नहीं मांगना नहीं चाहिए -

सांसद : प्रदेश में भाजपा के 10 सांसद हैं और बिल भी केंद्र सरकार ही लेकर आई है. इन सांसदों में से कोई किसानों के साथ नहीं खड़ा हुआ, जबकि किसानों के वोट तो इन्होनें भी लिए थे. वहीं इन दस में से 3 तो केंद्र में मंत्री भी हैं इसके बावजूद उन्होंने तो किसानों का साथ नहीं दिया. इतना ही नहीं इन 10 में से तीन सांसदों को तो कमेटी में भी रखा गया था लेकिन उनसे किसी ने नहीं पूछा कि कमेटी ने क्या किया, किसानों के हक की कौनसी बात उठाई. क्या इनसे इस्तीफा नहीं मांगना नहीं चाहिए.

सीएम मनोहर लाल : ये प्रदेश के मुखिया हैं और किसानों से तो वोट इन्होनें भी लिए हैं. इनसे जांच की मांग की गई लेकिन इन्होनें जांच करने की जगह दो मिनट में ब्यान दे दिया कि कोई लाठीचार्ज नहीं हुआ पुलिस ने सेल्फ डिफेंस में बल प्रयोग किया है. क्या प्रदेश में किसी विपक्षी पार्टी में दम नहीं है जो इनसे इस्तीफा मांग ले.

गृह मंत्री अनिल विज : इनके पास पुलिस का महकमा है जिसने लाठीचार्ज किया. उसके बाद भी इन्होनें जांच करने की जगह कह दिया कि कोई लाठीचार्ज नहीं हुआ और कोई जांच नहीं होगी. इनसे किसी ने इस्तीफा क्यों नहीं मांगा.

भाजपा मंत्रीमंडल : प्रदेश में भाजपा के जो मंत्री हैं उनमें से किसी ने साहस नहीं दिखाया कि वो किसानों के साथ खड़े हों और उनका साथ दें क्या किसी ने किसी भी मंत्री का इस्तीफा मांगने की हिम्मत दिखाई.

रणजीत चौटाला : दुष्यंत की तरह रणजीत चौटाला भी तो देवीलाल परिवार से ही हैं. वो भी भाजपा के खिलाफ किसानों से वोट लेकर निर्दलीय विधायक बने थे. उसके बाद अब भाजपा को समर्थन देकर राज्य सरकार में बिजली और जेल मंत्री भी हैं. इनसे भी तो कोई इस्तीफा मांगने का दम दिखाए. निर्दलीय : कई निर्दलीय विधायकों ने भाजपा को समर्थन दे रखा है. इतना ही नहीं कई निर्दलीय विधायक तो सरकार में चेयरमैन भी बन कर बैठे हैं लेकिन इनमें से कोई तो न किसी ने इस्तीफा दिया और न ही इनसे कोई इस्तीफा मांग रहा है.

- अंत में इतना ही कहेंगे कि किसी के इस्तीफा देने या नहीं देने से कुछ फर्क नहीं पड़ता. किसानों को इन अध्यादेशों को समझना चाहिए. अगर ये फायदेमंद हैं तो विपक्ष की राजनिति से बचें और ये बिल किसानों के खिलाफ हैं तो फिर अकेले दुष्यंत ही नहीं इन सब से भी इस्तीफा मांगना चाहिए.

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