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अधिकारीयों की मीटिंग में डिप्टी सीएम दुष्यंत को क्यों आया गुस्सा?

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला आजकल काम न करने वाले अधिकारीयों को लेकर खासे नाराज चल रहे हैं। प्रदेश में मनरेगा की योजनाओं को लागू करने में सुस्ती बरतने वाले अधिकारी बैठक में डिप्टी सीएम के निशाने पर रहे। उन्होंने संबंधित मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ)से सिलसिलेवार ढंग से एक-एक जिले की मनरेगा के कार्यों की रिपोर्ट ली।

उन्होंने मनरेगा के टारगेट पूरे न करने वाले अधिकारियों से डिप्टी सीएम ने इसके लिए न केवल जवाब-तलबी की, साथ ही इस पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय में वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से हुई बैठक में डिप्टी सीएम ने सभी सीईओ को मनरेगा में दिए अपने बकाया कार्यों की अप्रूवल लेकर मुख्यालय को 10 दिन में रिपोर्ट करने और अगले दो माह में दिए गए टारगेट को पूरा करने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं उन्होंने मनरेगा में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की पीठ भी थपथपाई और दूसरे जिलों को इनका अनुसरण करने को कहा। बैठक में विभिन्न आठ विभागों के आला अधिकारियों सहित संबंधित जिलों के सीईओ ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से भाग लिया।

डिप्टी सीएम ने कहा कि मनरेगा में अच्छा काम हो रहा है और रिकार्ड लोगों को रोजगार मिला है परन्तु कुछ जिलों में प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने प्रदेश भर में पिछले वर्ष के मुकाबले में इस वर्ष प्रथम छहमाही में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया परन्तु अभी मनरेगा के तहत प्रदेश में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान प्रदेश के लोगों को मनरेगा के माध्यम से अधिक से अधिक रोजगार देना प्राथमिकता रहा है।

दुष्यंत चौटाला ने मनरेगा के तहत फिसड्डी रहने वाले जिलों का ब्यौरा संबंधित सीईओ से पूछा। बैठक में बताया गया कि मनरेगा में सबसे कम कुरूक्षेत्र में 64 प्रतिशत काम हुआ है और 25 गांवों में कोई काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद जींद में 71 प्रतिशत काम हुआ और 44 पंचायतें ऐसी है जहां कार्यों की शुरूआत होनी बाकी है। यमुनानगर में 71.8 प्रतिशत काम हुआ और 68 गांवों में काम होना बाकी है। दादरी और पंचकुला जिले भी इन्हीं श्रेणी में है, जहां क्रमश: 72 प्रतिशत, 73 प्रतिशत काम हुआ है। डिप्टी सीएम ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए कि प्रदेश में एक भी गांव ऐसा नहीं बचना चाहिए जहां मनरेगा की स्कीम के तहत काम न हों। लॉकडाउन में प्रदेश के जरूरतमंद हर व्यक्ति के हाथ में मनरेगा के तहत काम मिलना चाहिए चाहे इसके लिए संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से अनुमति लेकर इनका दायरा क्यों न बढ़ाना पड़े।

डिप्टी सीएम ने बैठक में मनरेगा के तहत किए गए एक प्रावधान का हवाला देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि कोई कार्ड होल्डर व्यक्ति मनरेगा के तहत उनसे काम मांगता है और अधिकारी उसे तय समय सीमा में काम उपलब्ध करवाने में असमर्थ हैं तो, घर बैठे संबंधित व्यक्ति को तय नियमों के अनुसार मानदेय का भुगतान करवाएं।

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