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अगर आप भी आईएएस या आईपीएस बनने का सपना देख रहे हैं, तो यह इंटरव्यू जरुर पढ़ लें

नौकरी पर रहकर की तैयारी, दो बार असफलता, फिर भी करता रहा मेहनत और अब सोनीपत के प्रदीप मलिक ने देश में पहली रैंक पाई।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल परीक्षा 2019 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। सोनीपत के गांव तेवड़ी निवासी प्रदीप सिंह ने देश में टॉप किया है। दूसरे स्थान पर जतिन किशोर आए हैं। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की प्रतिभा वर्मा ने तीसरा स्थान पाया है। वह महिला उम्मीदवारों में प्रथम रहीं।‌‌ इस बार 829 उम्मीदवारों को सफलता मिली है। टॉपर प्रदीप किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता गांव के सरपंच भी रहे हैं। मां शीला देवी गृहिणी हैं। उन्हें यह सफलता चौथे प्रयास में मिली है।

पहले दो प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) भी क्लियर नहीं कर पाए थे। 2018 में उन्हें 260वीं रैंक मिली थी। अभी वे फरीदाबाद में इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) की ट्रेनिंग कर रहे थे। भास्कर से प्रदीप ने बताया कि 12वीं के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। 2015 में एसएससी पास कर दिल्ली में इनकम टैक्स ऑफिसर बने थे। इसी दौरान उन्होंने आईएएस बनने की ठानी।

ऑफिस में 1 घंटे का लंच ब्रेक होता था। वे सिर्फ 10 मिनट में लंच खत्म करते और 50 मिनट पढ़ाई में देते थे। प्रदीप पूरे सप्ताह का रूटीन बनाकर रखते थे। अगर किसी दिन पढ़ाई कम हो पाती थी तो उसकी भरपाई अगले दिन करते थे। पिता सुखबीर सिंह उनके लिए सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे हैं।


पढ़िए प्रदीप मलिक का विशेष इंटरव्यू ...

Q. सबसे पहले तैयारी के लिए हौसला किसने दिया? A. जब मेरा दाे बार प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ, तब मैंने कुछ आगे नहीं करने की सोची थी। पिता ही थे, जिन्होंने मुझे और पढ़ने के लिए प्रेरित किया। Q. इस सफलता के बीच में अड़चन क्या आई। उसे कैसे दूर किया? A. मैं इनकम टैक्स में इंस्पेक्टर था। जॉब नहीं छोड़ सकता था, परिवार में यही एक सरकारी नौकरी थी। बाद में मैंने छुटि्टयां लेकर तैयारी की। संकल्प किया कि बेहतर करना ही है। 2018 में 260 रैंक आई। तब आईआरएस के लिए चुना गया। Q. परीक्षा के लिए खुद को कैसे तैयार किया? A. सबसे पहले पढ़ाई के लिए घंटे गिनने की घड़ी बंद की। तय किया कि जब तक कोई कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं हो पढ़ाई करो। हर सप्ताह एक सिलेबस चुनता था। यह नहीं था कि इतने घंटे पढ़ाई करनी ही है। कई बार एक-दो दिन का ब्रेक भी लेता था। ऑफिस टाइम में लंच मेरे लिए एक घंटे का नहीं, बल्कि दस मिनट का था। बाकी 50 मिनट पढ़ाई करता था। Q. साक्षात्कार में किस सवाल ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया? A. एक पल ऐसा आया, जब खुद को किसान का बेटा हाेने पर गर्व हुआ। 35 मिनट की साक्षात्कार के दौरान बाॅयोडाटा में जो जानकारी दी थी, उससे जुड़ा कोई सवाल नहीं पूछा गया। पूछा गया कि सरकार का दावा है कि 2022 तक किसान की आमदनी दोगुनी हो जाएगी। क्या हकीकत में ऐसा संभव है। इस पर मेरा जवाब था कि माैजूदा हालात में मुश्किल है, लेकिन यदि घोषणाओं को सही मायने में हकीकत में बदला जाए तो संभव भी है, जैसे किसान को कहीं भी फसल बेचने की छूट हो। Q. रैंक-1 मिलने पर पसंदीदा स्टेट कैडर चुनने का मौका मिला है, कहां सर्विस करना पसंद करेंगे? A. अपने हरियाणा में ही। Q. ऐसा कौन सा क्षेत्र है, जहां आप विशेष मेहनत करना चाहेंगे? A. हरियाणा कृर्षि प्रधान राज्य है। इसलिए मेरी पहली प्राथमिकता किसानाें की समस्याओं को सरकार के साथ मिलकर दूर करने की रहेगी।

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