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दुष्यंत से नाराजगी अपनी जगह लेकिन ताऊ देवीलाल के पोस्टरों पर कालिख पोतना और फाड़ना कितना सही?

पिछले कुछ समय से डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से लोगों की नाराजगी चल रही है, भले ही उनकी गलती कितनी भी हो या नहीं हो लेकिन उनसे नाराजगी लोगों की अपनी जगह हो सकती है. लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री स्व.ताऊ देवीलाल के पोस्टरों के साथ गलत व्यहवार करना कितना सही है?

दरअसल, शुक्रवार को प्रदेशभर में ताऊ देवीलाल के 107 वां जन्मदिन जेजेपी और इनेलो दोनों की तरफ से अलग-अलग तरीके से बनाया गया. लेकिन इस दौरान एक ऐसी घटना भी हुई जिसनें सभी को शर्मिंदा कर दिया. अम्बाला में कुछ लोगों ने पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व.ताऊ देवीलाल के पोस्टरों पर कालिख पोत दी और पोस्टर फाड़ दिए. इसको लेकर लोगों का कहना है कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से नाराजगी के चलते ऐसा किया गया. लेकिन हमारे सूत्र कह रहे हैं कि यह सब नाराजगी की वजह से नहीं बल्कि कुछ राजनितिक लोगों ने किया है. वैसे भी डिप्टी सीएम से किसी की भी नाराजगी अपनी जगह हो सकती है लेकिन ताऊ देवीलाल जिनको प्रदेश के सभी लोग मानते हैं उनके पोस्टर फाड़ना और कालिख पोतना कहीं भी सही नहीं ठहराया जा सकता. हमारे सूत्र बता रहे हैं कि कुछ लोगों ने किसान आंदोलन के नाम पर यह काली करतूत की है. अंबाला में जननायक किसान मसीहा चौधरी देवीलाल के पोस्टर पर कालिख पोती है और उन्हें फाड़ा है. कुछ लोगों की पहचान वीडियो और फोट में हो भी रही है. कहा जा रहा है कि इन लोगों की पहचान एक राजनितिक पार्टी से जुड़े लोगों के रूप में हुई है.

- अंत में आप लोगों को फैसला लेना है कि क्या दुष्यंत से नाराजगी के चलते ताऊ देवीलाल के पोस्टरों पर कालिख पोतना कितना सही है या फिर ऐसे राजनितिक लोगों को पकड़ कर सही में ओई सजा दी जानी चाहिए?

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