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डिप्टी सीएम का बड़ा फैसला, अब पूरी तरह बदल जाएगी रजिस्ट्री प्रक्रिया, तहसीलों में जाने से पहले पढ़ें

एग्रीकल्चर शब्द और लिमिट होगी 7ए में खत्म, अब डीसी की मंजूरी से होगी रजिस्ट्री, प्रोपर्टी और हाउस टैक्स का भुगतान जरूरी, बनेगा ज्वाइंट सिस्टम। तीन साल पहले राजस्व विभाग के 7 ए नियम में बदलाव करके 1 हेक्टयर से कम करके 2 कनाल की दी थी लिमिट, इसी का डीलरों और अधिकारीयों ने उठाया फायदा।


हरियाणा में रजिस्ट्री करने का तरीका अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। इस प्रक्रिया के अंदर सरकार कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर चुकी है। सबसे पहला बदलाव 7ए नियम के अंदर किया जाएगा। अब इससे एग्रीकल्चर शब्द और जमीन की लिमिट दोनों ही पूरी तरह खत्म होने जा रहे हैं। रजिस्ट्री के लिए प्रोपर्टी टैक्स और हाउस टैक्स का भुगतान हुआ अहोना जरूरी होगा। अब इस एरिया के अंदर रजिस्ट्री के लिए सीधे तौर पर डीसी जिम्मेदार होगा और उसकी मंजूरी पर ही इस एरिया में कोई रजिस्ट्री हो पाएगी। वहीं इस काम से जुड़े संबंधित जितने भी विभाग हैं उनका एक ज्वाइंट सिस्टम तैयार हो रहा है, जिस पर सभी डेटा ऑनलाइन होगा और कहीं भी कोई दिक्कत आएगी तो संबंधित विभाग एक सप्ताह के अंदर जांच करके देंगे।


बदलाव क्यों जरूरी : जांच में सामने आया कि अधिकारी और प्रॉपर्टी डीलर 7-ए के लचीलेपन का फायदा उठा रहे थे। सिर्फ गुड़गांव जिले में 1447 रजिस्ट्रियों में 7-ए का उल्लंघन हुआ। एक तहसीलदार और पांच नायब तहसीलदार सस्पेंड किए गए हैं। भ्रष्टाचार रोकने को 7-ए में बदलाव जरूरी है।

यह है मौजूदा व्यवस्था : नियम में बदलाव का फायदा उठा प्रॉपर्टी डीलर दो कनाल से ज्यादा कृषि जमीन की बिना एनओसी रजिस्ट्री कराकर अवैध कॉलोनियां बसाने लगे। हाल ही में हुई जांच में सामने आया है कि कुछ जिलों के तहसीलदारों ने बिना एनओसी कृषि जमीन को गैरमुमकिन जमीन में बदल गलत रजिस्ट्रियां कर दीं। प्रावधान था कि 7-ए की खाली पड़ी 1 हेक्टेयर से कम जमीन की रजिस्ट्री बिना एनओसी नहीं होगी। 3 अप्रैल 2017 को हरियाणा डेवलपमेंट एंड अर्बन रेगुलेशन एक्ट 1975 की धारा 7-ए में सरकार ने संशोधन किया। खाली जमीन की जगह कृषि और एक हेक्टेयर की जगह लिमिट कम कर महज दो कनाल कर दी।

यह है 7-ए : टाउन एंड प्लानिंग विभाग अर्बन एरिया से लगती खाली जमीन को प्लानिंग के लिए रोक कर उसे 7-ए अधिसूचित एरिया घोषित करता है।

अब डीसी के दस्तखत जरूरी : सरकार प्रावधान करने जा रही है कि 7ए अधिसूचित एरिया की जो भी रजिस्ट्री होंगी वो बिना डीसी की परमिशन के नहीं होंगी। नियम में ‘ऑन अप्रूवल डिप्टी कमिश्नर’ शब्द जोड़ा जाएगा। अगर कोई इस एरिया में रजिस्ट्री करवाना चाहता है तो डीसी संबंधित विभागों से उसकी जांच करवाएंगे और फिर खुद लिखित में परमिशन देंगे, उसके बाद ही रजिस्ट्री होगी। अब तक इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत डीसी अपने जिले में रजिस्ट्रार होता है लेकिन किसी भी डीड पर डीसी के साइन नहीं होते थे। अब डीसी के साइन भी होंगे और उन्हें जांच करवाकर परमिशन देनी होगी, जिससे डीसी गलती के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। इससे कार्य में पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रॉपर्टी-हाउस टैक्स जरूरी : अब कोई भी रजिस्ट्री करवाने के लिए उसका प्रॉपर्टी टैक्स और हाउस टैक्स का भुगतान किया होना अनिवार्य होगा। इसके बिना रजिस्ट्री होगी ही नहीं। इसके लिए बाकायदा अर्बन लोकल बॉडीज अपने एक्ट के अंदर बदलाव करने जा रही हैं। प्रॉपर्टी व हाउस टैक्स जो हमेशा बकाया रहता है, उसका भुगतान होने लगेगा। साथ ही जिस जमीन की रजिस्ट्री होनी होगी अगर उसका प्रॉपर्टी या हाउस टैक्स का भुगतान नहीं हुआ होगा तो डीसी की कमेटी के जांच में पकड़ में आ जाएगा।

बड़ा बदलाव : 7-ए अधिसूचित एरिया में जो नया प्रावधान होने जा रहा है, उसमें एग्रीकल्चर शब्द का प्रयोग ही नहीं होगा। वहीं 2 कनाल की लिमिट भी नहीं रहेगी। मौजूदा घोटाले में सबसे अधिक उल्लंघन 7-ए में ही हुआ है। इससे 7-ए अधिसूचित एरिया और स्पष्ट हो जाएगा। उसमें किसी तरह की कैटेगरी न रहने से अलग-अलग नियमों के चक्कर में नहीं पड़ना होगा, इससे गड़बड़ी को पकड़ना आसान होगा।

सॉफ्टवेयर करेगा अलर्ट : अब राजस्व विभाग, टाउन एंड प्लानिंग, शहरी निकाय, एचएसवीपी, एचएसआईआईडीसी समेत जितने भी विभाग जमीन से जुड़े हैं, उनका डेटा एक नए जॉइंट सॉफ्टवेयर पर अपडेट किया जा रहा है। इसमें लॉक का सिस्टम होगा। सभी विभाग उस जमीन का खसरा नम्बर आदि इसमें अपडेट करके लॉक लगा देंगे, जिसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इससे तहसील में ऑनलाइन पता चल जाएगा कि किस विभाग की कौनसी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करनी है। अगर कोई उसमें छेड़खानी करेगा तो संबंधित विभाग को पता चल जाएगा। अगर किसी जमीन पर निर्णय लेने में तहसील को दिक्कत आएगी तो संबंधित विभाग एक सप्ताह के अंदर जांच करके देगा।

कोई बच नहीं सकेगा :

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बताया कि हमने जब खुद रजिस्ट्री सिस्टम को रिव्यू करवाया तो उसमें कई खामियां नजर आई। इसलिए हमने रजिस्ट्रियों को रुकवा कर इसकी सही से जांच करवाई तो सामने आया कि कुछ तहसीलों में अधिकारीयों ने गडबड की हुई थी। इसकी सीनियर अधिकारीयों से जांच करवाई और उसके बाद दोषी अधिकारीयों पर तुरंत कार्रवाई भी की। आगर इस सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और सरल कैसे बनाया जाए इस पर विभाग काम कर रहा है। सबसे बड़ा बदलाव जो हम करने जा रहे हैं वो यह है कि अब 7ए नियम के अंदर से एग्रीकल्चर शब्द और जमीन की लिमिट खत्म कर रहे हैं और कंट्रोल एरिया में रजिस्ट्री की जिम्मेदारी डीसी के पास होगी। डीसी की परमिशन के बाद ही जांच हो पाएगी। अभी तक डीसी की निगरानी में सारा काम होते हुए भी वो सीधे जिम्मेदार नहीं थे क्योंकि उनके डीड पर साइन नहीं होते थे इसलिए अब वो सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार होंगे।

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