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इस गांव ने बदल दिए 805 साल पुराने रीति-रिवाज, जानिए क्या है नया फरमान?

हरियाणा के सोनीपत जिले में दहिया खाप का गांव नाहरी। इस गांव में रविवार को दो अहम फैसले लेकर 805 साल पुरानी दो परंपराओं को बदल दिया गया।

गांव में तेरहवीं पर आयोजित होने वाला मृत्युभोज और शादी में कन्या पक्ष से लेने वाली खरड़ की मान बंद होगी। पंचायत ने सर्वसम्मति से फैसला लेते हुए इसे पूरे गांव में लागू कर दिया है। नाहरी गांव की चौपाल में ओमप्रकाश नंबरदार की अध्यक्षता में पंचायत हुई। पंचायत का आयोजन गांव की युवा टीम द्वारा किया गया था, लेकिन जिन विषयों पर पंचायत बुलाई गई थी, उसे लागू कराने में गांव के बुजुर्गों की सहमति जरूरी थी। पंचायत ने प्रस्ताव रखा गया कि गांव में तेरहवीं पर आयोजित होने वाले मृत्युभोज का कार्यक्रम बढ़ रहा है। जो समाज में अमीर व गरीब के बीच भेदभाव पैदा कर रहा है। इसलिए मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंद लगना चाहिए।


दूसरा विषय लड़के की शादी में कन्यापक्ष द्वारा दी जा रही मान यानि पैसे से सम्मान से भी दहेज प्रथा को बढ़ावा मिलता है। युवाओं द्वारा उठाए गए दोनों विषयों पर गांव के मौजिज लोगों ने अपनी सहमति जाहिर की। इस दाैरान पूर्व सरपंच इंद्रजीत दहिया, डॉ. रामस्वरूप दहिया, भोलू प्रधान, पूर्व सरपंच रविंद्र दहिया, पदम सिंह दहिया, विक्की ठेकेदार, देवेंद्र, होशियार सिंह, रणबीर, राकेश, कुलदीप ठेकेदार आदि माैजूद रहे।

जब भी गांव में लड़के की शादी में सगाई की रस्म होती तो कन्या पक्ष के लोगों को सगाई की रस्म के दौरान जितने भी लोग बैठे होते, उनकी पैसे से मान करनी पड़ती थी। इसे खरड़ की मान कहते थे।


नाहरी गांव की सरपंच लता देवी व नाहरी पाना सिखान के सरपंच सुनील दहिया ने कहा कि गांव का ऐतिहासिक है। गांव में अन्य रूढ़ीवादी रीति-रिवाज के खिलाफ भी जागरूकता अभियान शुरू कराया जाएगा। गांव के युवाओं ने इसमें पहल करते हुए जनसमर्थन जुटाया, इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। तेरहवीं में गांव में बाकायदा न्यौता दिया जाता और 200 से 500 लोगों तक का खाना बनाया जाता था। इसे मृत्युभोज का नाम दिया जाता। इसमें अमीर व गरीब का भेद सामने आता था। गरीब व्यक्ति को भी मजबूरी में इस परंपरा का अनुशरण करना पड़ता था।

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