• न्यूज की न्यूज डेस्क.

न्यूज ये है कि : भाग बरौदा भाग, बिना वन टू थ्री गो कहे ही भाग रहे सब

न्यूज की न्यूज : बरौदा में उपचुनाव होने वाला है। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सब नेताओं की जुबान पर एक ही बात है कि भाग बरौदा भाग। ये तो वही बात हो गई कि रेफरी ने वन टू थ्री गो भी नहीं कहा और रेसर पहले ही भाग लिए। 

दरअसल, इस बार के विधानसभा चुनाव में भी बरौदा से श्रीकृष्ण हुड्डा कांग्रेस की तरफ से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। लेकिन लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। जिसकी वजह से बरौदा की सीट खाली हो गई और नियम है कि 6 माह के अंदर खाली हुई सीट पर उपचुनाव करवाना जरूरी होता है। ऐसे में सितंबर के अंत तक बरौदा में उपचुनाव सम्पन्न करवाए जाने हैं। लेकिन सभी पार्टियों की बरौदा के लिए दौड़ पहले से ही शुरू हो गई है और लगता है कोई भी इस चुनाव में कसर नहीं छोड़ना चाहता है। जानिए बरौदा में ऐसा क्यों हो रहा है और वहां क्या चल रहा है।

- पहले थोडा बरौदा का हालचाल ले लेते हैं। हालात ये हैं कि आजकल बरौदा की सडकों से लेकर गलियों में भीड़ बढ़ गई है। हर रोज किसी ने किसी पार्टी का कोई बड़ा नेता बरौदा के किसी न किसी गांव के अंदर होता है। छोटे नेताओं का तो कहना ही क्या है। -  कुछ नेताओं ने तो अपना शेड्यूल तय कर लिया है और उसके अनुसार वहां जा रहे हैं। जैसे जेजेपी की तरफ से एक र्विअर को अजय चौटाला और एक रविवार को दिग्विजय चौटाला बरौदा क्षेत्र के गांवों का दौरा करते हैं। वहीं इनेलो से कभी अभय तो कभी अर्जुन चौटाला गांवों में होते हैं। - कुछ नेता तो ऐसे हैं जिन्होनें वहां डेरा ही डाल लिया है। जैसे कि कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा। वो तो एक आध दिन छोडकर हर रोज आजकल बरौदा का हालचाल जानने जरुर जाते हैं। - बीजेपी ने अपने सोनीपत, पानीपत, जींद और रोहतक जिलों के मंडल अध्यक्षों समेत कई पूर्व विधायकों और मंत्रियों की बरौदा में ही टहलने की ड्यूटी लगा रखी है। बीजेपी ने इसी जल्दी में अपना प्रदेश अध्यक्ष भी घोषित किया और जाट नेता पर दांव खेला है।

इतनी जल्दी क्यों है :  - इस जल्दी के भी हर किसी पार्टी के अपने कारण हैं। शुरुआत इनेलो से करते हैं। इनेलो इस चुनाव में अपना खोया वजूद पाने की कोशिश कर रही है। इसलिए वो पहले से ही ग्राउंड तैयार करने में लगी है। - बात कांग्रेस की करें तो एक तो उनके नाक का सवाल है क्योंकि यह सीट पिछली कई बार से उनके नाम रहती है आई है उन्हें इसे बचाना है। दूसरा उन्हें किसी ने सुनहरा सपना दिखा दिया है कि अगर उपचुनाव जीत गए तो सरकार गिर सकती है। वो कैसे होगा इसके बारे में कांग्रेस ही बता सकती है। - बात गठबंधन सरकार की कर लेते हैं। भले ही दोनों पार्टियों का कहना है कि हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे लेकिन दोनों पार्टी अपना उम्मीदवार उतारना चाहती हैं। इसका कारण यह है कि भाजपा एक सीट ओर जीतकर अपनी सरकार मजबूत करना चाहती है, जिससे कम निर्दलियों और जजपा की जरूरत रहे। वहीं जजपा चाहती है कि अगर उसे बरौदा सीट भी मिल जाए तो उसके विधायकों की संख्या बढ़ जाएगी और सरकार में भाजपा उनके ऊपर और ज्यादा निर्भर हो जाएगी।

हालांकि क्या होगा यह तो चुनाव की घोषणा के बाद ही पता चलेगा, तब तक बिना मेडल की दौड़ देखते रहें और मजे लेते रहें।

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