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किसने की बरोदा चुनाव की महम चुनाव के साथ तुलना?

बरोदा उपचुनाव को लेकर राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। भाजपा और कांग्रेस से लेकर इनेलो तक के नेता एक-दूसरे के बारे में जमकर ब्यानबाजी कर रहे हैं।

इसी कड़ी में अब कांग्रेस के नेता और पूर्व सीएम भूपेन्द्र हुड्डा ने बरोदा चुनाव को लेकर बड़ा ब्यान दिया है। उपचुनाव को लेकर रोहतक के सिंहासन बैंक्वेट हॉल में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल के साथ हरियाणा कांग्रेस के विधायकों व वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और उसके बाद एक प्रेसवार्ता भी हुई। जिसमें पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जिस तरह महम उपचुनाव ने लोकदल सरकार का तख्ता पलट किया था, उसी तरह बरोदा का नतीजा BJP-JJP सरकार की जड़ें हिला देगा। जो हरियाणा हमारी सरकार मे निवेश, खुशहाली,रोजगार मे नंबर 1 था, उसे BJP ने बेरोजगारी,अपराध, नशे,बदहाली मे नम्बर 1 बना दिया। जनता अब बदलाव चाहती है। भूपेन्द्र हुड्डा ने जो बरोदा उपचुनाव की तुलना महम उपचुनाव से की है उससे उन्होंने सीधा संदेश दिया है कि वो भाजपा, जजपा और निर्दलीय विधायकों के संपर्क में हैं और इसके बाद सरकार गिराने की हर संभव कोशिश करेंगे।

जानिए क्यों हरियाणा के इतिहास में महत्वूर्ण है महम उपचुनाव :  रोहतक जिले की महम विधानसभा सीट से देवीलाल चुनाव लड़ते थे। एसवाईएल के मुद्दे पर पूरे प्रदेश में चली आंधी में महम से ही विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देवीलाल काबिज हुए थे। हरियाणा की 90 सीटों में से 85 पर देवीलाल व उनके समर्थकों ने जीत हासिल की थी। देवीलाल का राजनीतिक रसूख अपने प्रबल तेज के साथ पूरे देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता था। देवीलाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए 1989 के लोकसभा चुनाव में रोहतक व सीकर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। देवीलाल दोनों ही सीटों पर चुनाव जीत गए। इसके बाद देवीलाल ने रोहतक की सीट की जगह सीकर को चुना और वीपी सिंह की सरकार में उपप्रधानमंत्री बनें। इसके बाद उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अपने बेटे ओम प्रकाश चौटाला को बैठा दिया।

देवीलाल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के साथ ही महम विधानसभा सीट से भी इस्तीफा दे दिया। महम विधानसभा सीट पर 1990 में उपचुनाव की घोषणा हुई। मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को देवीलाल ने महम उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया। वहीं दूसरी तरफ देवीलाल के ही एक शिष्य आनंद सिंह दांगी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया। इस उपचुनाव में जमकर हिंसा हुई। हिंसा के कारण दो बार उपचुनाव टाला गया। इसके बाद तीसरी बार उपचुनाव हुआ। इसमें आनंद सिंह दांगी को जीत हासिल हुई। लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस चुनावी परिणाम व हिंसा ने देवीलाल के राजनीतिक कैरियर पर ऐसा ग्रहण लगाया जिससे देवीलाल कभी उबर नहीं पाए। देवीलाल जब देश के उपप्रधानमंत्री थे तो उनकी गिनती देश के प्रमुख नेताओं में होती थी। लेकिन महम कांड के बाद उनका कैरियर लगातार ढलान पर ही होता गया।

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